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मंगलवार, 10 सितंबर 2013

surdasji maharaj rampura sirohi

बाल ब्रह्मचारी महान मेघवाल संत श्री श्री 1008 श्री सूरदास जी महाराज
राजस्थान की धन्य धरा के अरावली पर्वतमाला की गोद मे स्थित देव नगरी सिरोही के पास स्थित रामपुरा नामक ग्राम मे विक्रम संवत 1917 ईस्वी सन 1959 को जोगचंद गोत्रीय मेघवाल परिवार मे श्री मगाराम जी के घर पर उनकी धर्म पत्नी श्रीमती कंकु देवी की कोख से एक होनहार बालक सवाराम का जन्म हुआ था।  





    आप चार भाई क्रमश रूपारामजी, गणेशाराम जी, मोहनलालजी एवं आप सबसे छोटे होने से माता - पिता  का सम्पूर्ण वात्सल्य पूर्ण रुप से मिलने से आपका लालन - पालन बड़े लाड प्यार से  किया गया, तत्कालीन समय मे शिक्षा के प्रति समाज मे रुझान नहीं होने पर भी आपकी माताश्री ने आपको शिक्षा हेतु विद्यालय भेजा, कुशाग्र बुद्धि के धनी बालक सवाराम ने  कक्षा 2 तक शिक्षा ग्रहण की लेकिन कुदरत को ये मन्जुर नहीं था प्रकृति के कोप मे उस समय फेले चेचक रोग से आपके दोनों नेत्र चले गए इस कारण आपकी पढ़ाई बीच मे ही रुक गयी। 
    इस तरह आंखो की ज्योति जाने पर आपका पूरा समय घर पर ही बीतता था और ग्राम मे आने वाले साधू सन्तो की संगत करते और गाँव मे होने वाले रात्री जागरण मे आने जाने से आपमे राम  भक्ति का मोह जाग्रत हो गया तदुपरान्त आपने सन 1968 मे देवगिरि, जिला सिरोही मे अपने गुरु विष्णुदास जी महाराज से गुरु दीक्षा ग्रहण कर  भूतेश्वर महादेव मंदिर रामपुरा मे राम भजन करने लगे, जहा लगभग 40 साल तक आपने भक्ति की । 
आपने राम स्मरण के लिये एकांतवास को उपयुक्त जगह मान कर सिरोही -अणगोर  रोड पर राम रंग धाम की स्थापना की ,विशाल भु भाग पर आपने अपने भक्त जनो  के बेठने के लिये धर्मशाला का निर्माण कराया !
जंहा पर वर्तमान मे स्वेत संगरमर से राम मंदिर का निर्माण जारी हैं !
आपके अनुयाई सम्पूर्ण भारत वर्ष से आपके दर्शनार्थ आते हैं ,आपके आश्रम मे प्रत्येक पुर्णिमा को मेला लगता हैं !वंही आषाढ़ सुदी पुर्णिमा को विशेष भजन संध्या होती है ,जंहा महान ख्याति प्राप्त भजन गायक अपनी परस्तुति देतेहैं !गुरुवर स्वयं भजन गायक हैं !

आपके अनुयायि  हर जाती वर्ग से हैं जो आपके दर्शन मात्र से अपने आपको धन्य मानते हैं !
ऐसे महान कर्म योगी गुरुवर के चरणो मे कोटी-  कोटी वन्दन !!!